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#Hindi Ghazal

आँख का ऐतबार क्या करते जो भी देखा वो ख़्वाब में देखा

#Hindi Ghazal

आँखों से तेरी ज़ुल्फ़ का साया नहीं जाता आराम जो देखा है भुलाया नहीं जाता

#Hindi Ghazal

देख कर दिल-कशी ज़माने की आरज़ू है फ़रेब खाने की

#Hindi Ghazal

और तो दिल को नहीं है कोई तकलीफ़ ‘अदम’ हाँ ज़रा नब्ज़ किसी वक़्त ठहर जाती है

#Hindi Ghazal

मोहब्बत में हम तो जिए हैं जिएंगे, वो होंगे कोई और मर जाने वाले